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Sarangarh-Bilaigarh. सारंगढ़-बिलाईगढ़। जिले में ग्रीष्म ऋतु के दौरान संभावित पेयजल संकट को ध्यान में रखते हुए कलेक्टर एवं जिला दंडाधिकारी डॉ संजय कन्नौजे ने महत्वपूर्ण आदेश जारी किया है। छत्तीसगढ़ पेयजल परिरक्षण अधिनियम 1986 (क्रमांक 3), 1987 की धारा 03 के तहत पूरे सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिला को 1 मार्च 2026 से 31 जुलाई 2026 तक जलाभावग्रस्त क्षेत्र घोषित किया गया है। प्रशासन द्वारा जारी आदेश के अनुसार इस अवधि में अधिनियम की धारा 06 के तहत सक्षम अधिकारी की पूर्व अनुमति के बिना जिले में कोई भी नया नलकूप (बोर) पेयजल अथवा अन्य किसी प्रयोजन के लिए नहीं खोदा जा सकेगा। यह निर्णय भूजल स्तर में संभावित गिरावट को रोकने और आमजन को पर्याप्त पेयजल उपलब्ध कराने के उद्देश्य से लिया गया है।
हालांकि आदेश में शासकीय एजेंसियों को सीमित छूट प्रदान की गई है। लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग को पूरे जिले में पेयजल आपूर्ति के उद्देश्य से नलकूप खनन की अनुमति के लिए पूर्व स्वीकृति लेने की आवश्यकता नहीं होगी। इसी प्रकार नगरपालिका परिषद और नगर पंचायतों को अपने-अपने नगरीय निकाय की सीमा के भीतर केवल पेयजल प्रयोजन के लिए नलकूप खनन की अनुमति होगी। हालांकि इन संस्थाओं को भी इस अवधि में कराए गए नलकूपों की विस्तृत जानकारी प्राधिकृत अधिकारी को अनिवार्य रूप से उपलब्ध करानी होगी। नगर एवं ग्रामीण क्षेत्रों में निजी या अन्य प्रयोजन से नलकूप खनन कराने के लिए संबंधित अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) से विधिवत अनुमति लेना अनिवार्य होगा। जनसुविधा को ध्यान में रखते हुए प्रशासन ने अधिनियम की धारा 06 के अंतर्गत अनुमति प्रदान करने के लिए प्राधिकृत अधिकारियों की नियुक्ति भी की है।
राजस्व अनुविभाग सारंगढ़ के अंतर्गत आने वाले क्षेत्रों के लिए अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) सारंगढ़ को तथा राजस्व अनुविभाग बिलाईगढ़ के अंतर्गत आने वाले क्षेत्रों के लिए अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) बिलाईगढ़ को प्राधिकृत अधिकारी नियुक्त किया गया है। ये अधिकारी अपने-अपने क्षेत्र में अधिनियम में वर्णित प्रावधानों के अनुरूप आवश्यकतानुसार नलकूप खनन की अनुमति प्रदान करेंगे। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यदि कोई व्यक्ति, संस्था या एजेंसी अधिनियम के प्रावधानों का उल्लंघन करते हुए बिना अनुमति नलकूप खनन कराती है, तो उसके विरुद्ध नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी। इसमें दंडात्मक प्रावधानों के तहत जुर्माना एवं अन्य वैधानिक कार्यवाही शामिल हो सकती है। कलेक्टर डॉ. संजय कन्नौजे ने कहा कि ग्रीष्म ऋतु में भूजल स्तर तेजी से नीचे चला जाता है, जिससे पेयजल संकट की स्थिति उत्पन्न हो सकती है। इसलिए जल संरक्षण और भूजल प्रबंधन अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने आमजन से अपील की है कि वे जल का विवेकपूर्ण उपयोग करें और अनावश्यक बोर खनन से बचें। जिला प्रशासन का मानना है कि इस निर्णय से भूजल स्तर को नियंत्रित रखने में सहायता मिलेगी तथा ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में पेयजल आपूर्ति सुचारु बनी रहेगी। आगामी चार महीनों तक इस आदेश का कड़ाई से पालन सुनिश्चित कराया जाएगा और संबंधित विभागों को नियमित निगरानी के निर्देश दिए गए हैं।
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